Tuesday, October 29, 2019

कश्मीर का नया सवेरा




कश्मीर का नया सवेरा

  बहुत दिनों के बाद देश में ऐसा भी दिन आया है।
अमर तिरंगा काश्मीर की घाटी में लहराया है॥
पहले तो पाकिस्तानी झण्डे घाटी में लहराते थे।
आई एस के आतंकी विषधर अपना फन फैलाते थे।
                             पत्थरबाजी होती रहती थी भारत की सेना पर।
बंदूकें  तनी रहती  थी कश्मीर  की जनता पर।
तीन सौ सत्तर हटा दिया तब सुमन अमन खिल पाया है।
अमर तिरंगा काश्मीर की घाटी में लहराया है॥1॥

सत्तर सालों से हम इन साँपों को दूध पिलाते थे।
अलगाववादी  हमारे  पैसों पर मौज मनाते थे।
देश तोड़ने में लगे हुए थे अपने पापी हाथों से।
हाथ मिला कर दुश्मन से छलनी करते घातों से।
सभी चाल नाकाम हो गई ऐसा खेल खिलाया है।
अमर तिरंगा काश्मीर की घाटी में लहराया है॥2॥ 

महक उठी केसर की क्यारी कली-कली मुसकाई है।
काश्मीर के कण-कण में आया प्रभात सुखदाई है।
अब सारा डर भूल सभी लगे है अपने कामों में।
स्वास मुक्ति का लेकर जनता जुटी हुई वदलावों में।
स्वाभिमान से सर ऊँचा हो जो चाहा सो पाया है।
अमर तिरंगा काश्मीर की घाटी में लहराया है॥3॥

आज युवा सेना में जाकर खुद का गौरव बढ़ा रहे।
दहशतगर्दी खत्म करेंगे संकल्पित मन बना रहे।
                               सरकारी  योजना  यहाँ  पर  सारी  लागू होंगी।    
लाभ सभी को यहाँ मिलेगा घर-घर खुशियाँ होंगी।
ख्वाब देखता रह जाएगा दुश्मन फिर घबराया है।
अमर तिरंगा काश्मीर की घाटी में लहराया है॥4॥ 



No comments:

Post a Comment