स्वप्न
आँखों में पलते स्वप्न सदा,कुछ बिखरे कुछ पूरे होते।
आँखों में पलते स्वप्न सदा,कुछ बिखरे कुछ पूरे होते।
अनजान भीड़ में कर्मवीर, सिंहों की भाँति खड़े होते॥
सपने न कभी सोने
देते, और नहीं कभी थकने देते।
बिन पूर्ण किए विश्राम कहाँ? वे
कार्यशक्ति में दम भरते।।
स्वप्नों
की भूल भुलैया में, वह बिखर गया जो भूल गया।
जीवन की मृतक अवस्था है,नैराश्य बाँह में झूल गया॥
स्वप्नों का मर जाना ही तो,जीवन मरने की निशानी है।
जो स्वप्न पूर्ति में लगा रहा,उसकी ही अमर कहानी है॥
मत चाहो और किसी को तुम, बस सपनों से प्यार करो।
सपनों तक ले जाने वाला, हर कंटक पथ स्वीकार करो।।
उसका जीना क्या जीना है,जिसने संघर्ष नहीं देखा।
जो बाधाओं में उलझ गया, जीवन
में हर्ष नहीं देखा।।
जीवन
आगे ले जाने में, ये सपने बड़े सहायक हैं।
ये
मानस के नव चिंतन हैं,शुभ कर्मों के फलदायक हैं॥
जो
स्वप्न बंद आँखों में हो,पूरा करने का हो प्रयत्न।
मंजिल
खुद ही मिल जाएगी, लग जाएं जब सारे सुयत्न॥
जिंदगी हसीन बनाते हैं, पूरे होते
हैं जब सपने।
दुनिया हाथों पर रखती है, अनजाने भी होते अपने॥
स्वप्नों के सुदृढ़ पंख लगा,ऊँची उड़ान भरना सीखो।
नाम शिखर पर अंकित हो, ऐसा कुछ करना सीखो॥
मृगतृष्णा
में मत उलझ कभी, जोर लगाकर काम करो।
विघ्नों
से लड़कर पार निकल,तब जाकरके विश्राम करो॥
फिर
लक्ष्य करेगा आलिंगन, जो
चाहोगे मिल जाएंगे।
हौसला
बनाकर चल राही, तब विजय वरण कर पाएंगे॥
फूलचंद्र विश्वकर्मा
स्नातकोत्तर शिक्षक (हिंदी)
केंद्रीय विद्यालय क्रमांक -2 वायु सेना स्थल हलवारा
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